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अगर हुआ ऐसा तो अमेरिका को घुटनों पर झुका सकता है ईरान...जानें क्या है वह बड़ी वज़ह!

अमेरिका और ईरान में तनातनी बढ़ गयी है...ईरान मेजर जनरल कासिम सुलेमानी का बदला लेने के लिए उतावला है...पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की चर्चा जोरों पर है.. अमेरिका ने इराक में ड्रोन हमले से ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या क्र दी...जिसके बाद ईरान बदले की आग में धधक रहा है...ईरान अपने मस्जिदों पर लाल झंडा फहरा कर युद्ध का ऐलान कर दिया है...अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से दुनिया पर असर पड़ना शुरू हो गया है. दुनियाभर में तेल की कीमतों में करीब 4 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है. दुनिया के ज्यादातर शेयर बाजार भी गिर चुके हैं और कई देशों में सोने की कीमतें बढ़ गई हैं. आइये हम आपको बताते है अगर तीसरा विश्वा युद्ध हुआ तो कौन किसपर भारी पड़ेगा.... रक्षा बजट अमेरिका - 716 बिलियन डॉलर ईरान - 6.3 बिलियन डॉलर सैनिक 12 लाख 81 हजार सैनिक ईरान- 5 लाख 23 हजार एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर अमेरिका- 10170 एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर ईरान- 512 एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर टैंक और तोप अमेरिका- 48 हजार 422 ईरान- 8 हजार 577 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अमेरिका- 3,318 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ईरान- 407 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट अटैक करने वाले हेलिकॉप्टर अमेरिका- 6,417 अटैक करने वाले हेलिकॉप्टर ईरान- 100 अटैक करने वाले हेलिकॉप्टर जहाज और पनड्डुबि अमेरिका- 415 जहाज और पनड्डुबि ईरान- 398 जहाज और पनड्डुबि अगर ये देश आये साथ तो ईरान के आगे नहीं टीक पायेगा अमेरिका ईरान के पास ज्यादातर छोटी और मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता है. जिनके जरिए ईरान इजराइल, खाड़ी के अरब देश और मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के ठिकानों सहित यूरोप के कुछ हिस्सों तक हमला कर सकता है. अगर युद्ध के हालात बनते हैं तो ईरान की साफ चेतावनी समझी जाती है कि वो तेल रोककर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार सकता है...इसलिए कोई भी देश ये नहीं चाहेगा की उसके रिश्ते ईरान से ख़राब हो....अमेरिका के खिलाफ ईरान के इस तरह के युद्ध में उसे लेबनान, यमन, इराक, रशिया और सीरिया का समर्थन मिल सकता है. लेकिन कोई भी देश इसमें खुलकर सामने नहीं आना चाहेगा...कयास ये भी लगाये जा रहे है की चाइना भी ईरान के समर्थन में आ सकता है अगर ऐसा हुआ तो ईरान अमेरिका पर बहुत भरी पड़ेगा...यही ईरान की सबसे बड़ी ताकत है..ईरान की धमकियों से साफ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है की उसे अंदर से खाड़ी देशो का समर्थन मिला हुआ है..ऐसे में अमेरिका के लिए ये जंग आसन नहीं होगी....