लखनऊ में धूमधाम से मनाई गई संत कबीर की 639वीं जयंती, वक्ताओं ने बताया आज भी प्रासंगिक हैं कबीर के विचार

 लखनऊ। राजधानी लखनऊ के उद्यान विभाग स्थित प्रेक्षा गृह में सोमवार, 29 जून को संत कबीर दास की 639वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। वक्ताओं ने संत कबीर के जीवन, उनके विचारों और समाज सुधार में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभी ने एक स्वर में कहा कि आज के समय में जब समाज में नफरत, भेदभाव और कटुता बढ़ रही है, ऐसे दौर में संत कबीर की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवा निवृत्त अधिशासी अभियंता इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद सोनवानी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एवं राज्यसभा सांसद माननीय बृज लाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कई प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। 



विशिष्ट अतिथियों में लखनऊ की मुख्य कोषाधिकारी श्रीमती साधना कोरी, कोरी/कोली समाज उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष भगवान दीन शंखवार तथा भंते दीपांकर प्रमुख रूप से मौजूद रहे। सभी अतिथियों का आयोजकों द्वारा पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।

सभा को महाबीर प्रसाद, सेल टैक्स विभाग के डिप्टी कमिश्नर के.पी. चौधरी, प्रतापगढ़ कोरी समाज के जिलाध्यक्ष राजा राम कोरी, मनीराम प्रबुद्ध, उत्तर प्रदेश कोरी संस्थान के अध्यक्ष राम सजीवन कोरी, समाजसेवी अरविंद शाक्य तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सरजू राम राव ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने संत कबीर के जीवन दर्शन, उनके सामाजिक संदेश और समानता की भावना को विस्तार से रखा।

कार्यक्रम के आयोजक किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रोफेसर डॉ. हरी राम ने अपने संबोधन में कहा कि संत कबीर केवल एक संत या कवि नहीं थे, बल्कि वे समाज सुधारक और मानवता के महान संदेशवाहक थे। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जिस प्रकार वैमनस्य, हिंसा और सामाजिक विभाजन का माहौल देखने को मिल रहा है, उसमें संत कबीर के विचार समाज को नई दिशा देने का कार्य कर सकते हैं।

डॉ. हरी राम ने कहा कि संत कबीर ने अपने दोहों और वचनों के माध्यम से प्रेम, भाईचारे, समानता और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने जाति, धर्म और ऊंच-नीच के भेदभाव का विरोध करते हुए इंसान को इंसान के रूप में देखने की शिक्षा दी। उनका मानना था कि प्रेम ही वह शक्ति है जो समाज और पूरे विश्व में शांति स्थापित कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि आज भी लोग संत कबीर के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं तो समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं का समाधान संभव है। 


मुख्य अतिथि एवं राज्यसभा सांसद बृज लाल ने अपने संबोधन में भगवान गौतम बुद्ध और संत कबीर के जीवन के बीच समानताओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों महापुरुषों ने मानवता, करुणा, सत्य और अहिंसा का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से संत कबीर की शिक्षाओं को केवल पढ़ने तक सीमित न रखने बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और जीवन में उतारने की अपील की।

बृज लाल ने कहा कि संत कबीर ने अपने समय में समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका संदेश आज भी समाज को एकजुट करने और नई सोच विकसित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि समाज में भाईचारा, समानता और प्रेम की स्थापना ही संत कबीर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने भी संत कबीर के दोहों और उनके सामाजिक संदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि कबीर की वाणी आज भी हर वर्ग के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने समाज में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकता को मजबूत करने पर बल दिया।

समारोह में लखनऊ, कानपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़ सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, युवा और महिलाएं भी मौजूद रहीं। सभी ने संत कबीर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का संचालन गन्ना संस्थान के सेवा निवृत्त उप निदेशक डॉ. नवल किशोर कमल ने किया। उन्होंने संत कबीर के जीवन पर आधारित कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित किया। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का कार्य करते हैं।

समारोह का समापन संत कबीर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक सद्भाव, समानता तथा मानवता के मूल्यों को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने कहा कि संत कबीर का संदेश केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है और आने वाली पीढ़ियों तक उनके विचारों को पहुंचाना समाज की साझा जिम्मेदारी है।

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