Home

6/recent

सरकारी योजनाओं से कोसों दूर कुम्हार, नहीं आए "अच्छे दिन"


कुमैल रिज़वी, अमेठी : प्लास्टिक से बने सामान के बढ़ते चलन से कुम्हारों का व्यवसाय अतीत की गाथा बन रहा था। पुश्तैनी धंधा छिनने से कई बेरोजगार हो रहे थे। पॉलिथीन प्रतिबंध के बाद प्रदेश सरकार ने अहम फैसले के तहत माटी कला बोर्ड गठित कर अच्छे दिन के संकेत दिए थे। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के बाद माटी और शिल्प कला उद्योग बोर्ड गठित होने से कुम्हारों के पुश्तैनी धंधे पर उम्मीद जगा दी थी। लेकिन सब दिखावा ही साबित हुआ।


मिट्टी के दीये, बर्तन, खिलौने और अन्य कलाकृतियां हमारी समृद्ध लोककला और लोक संस्कृति का हिस्सा रही हैं। लेकिन, आधुनिक चमक-दमक में ये लुप्त हो रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुम्हारों के कल्याण के लिए कहा था कि प्रजापति समाज के लोगों को मिट्टी की किल्लत न हो इसके लिए उन्हें पट्टे दिए जाएंगे और पात्र व्यक्तियों को लोहिया आवास योजना के तहत पक्के मकान मुहैया कराए जाएंगे। उनके गांवों को जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना के तहत विकसित कराया जाएगा। साथ ही कुम्हारों के लिए अलग से मार्केट भी बनाया जाएगा। इतना ही नहीं, योगी सरकार ने भी पिछले वर्ष कुम्हारों को हाईटेक करने का वादा किया था और उनको इलेक्ट्रिक चाक वितरण करने की बात कही थी। लेकिन अभी भी न तो उनको इलैक्ट्रिक चाक मिला और न ही मिट्टी की किल्लत से निबटने के लिए पट्टा।


जिले में अच्छी संख्या में कुम्हार हैं। इनमें अधिकांश ऐसे हैं, जिनका परिवार सिर्फ चाक के धंधे पर की पूरी तरह निर्भर करता है। पूर्ववर्ती सरकारों के ध्यान नहीं देने से इनका व्यवसाय दिनोंदिन चौपट होता गया।

क्या कहते हैं अमेठी के कुम्हार -
मुसाफिरखाना कस्बा में रहने वाले कन्हईलाल प्रजापति और दसईलाल प्रजापति का कहना है कि "घर में आठ बच्चे हैं लेकिन सब पढ़ लिखकर बेरोजगार हैं। नौकरी है नहीं और प्लास्टिक, फाइबर ने हमारे व्यवसाय को चौपट कर दिया है। सरकार ने चाक देने की बात कही थी, भाजपा के कार्यकर्ता नाम लिखकर ले गए थे। लेकिन तीन महीने बीत गए अभी तक ना तो फोन आया और ना ही चाक मिला। चुनाव के साथ-साथ हमारी उम्मीदों पर भी विराम लग गया है।