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प्राथमिक विद्यालय की तीन लड़कियों का नाम गिनीज़ बुक में हुआ दर्ज...

इटियाथोक शिक्षा क्षेत्र के भीखमपुरवा स्कूल की तीन नन्ही बच्चियां इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने जा रही हैं जो कहीं ना कहीं क्षेत्र व जिले के लिए बड़े ही गौरव की बात है। बताते चलें कि इसके पूर्व यही की नन्हीं अंशिका मिश्रा ने कुछ ऐसा ही करके देश प्रदेश में अपना नाम चर्चा में लाया है और अब यहां की तीन नन्ही बच्चियां अंशिका से प्रेरणा लेकर ऐसा ही कुछ करने जा रही है। पढ़ाई लिखाई के मामले में आगे रहने वाले प्राथमिक विद्यालय भीखमपुरवा में कक्षा 5 में पढ़ने वाली 10 साल की सुप्रिया वर्मा ने अत्यंत कठिन मयूरासन को सर्वाधिक 4 मिनट 5 सेकेंड तक किया है। वही कक्षा 5 में पढ़ने वाली 11 साल की काजल ने कुक्कुटासन को सर्वाधिक समय 14 मिनट 12 सेकंड तक किया है। इसके अलावा मात्र 4 साल की कक्षा 1 में पढ़ने वाली नन्ही बबली ने एशिया महाद्वीप के देश व राजधानी के नाम सहित भारत के राज्य व उनकी राजधानियों के नाम एवं उत्तर प्रदेश के मंडलों व जिलों के नाम सबसे कम समय 2 मिनट 8 सेकंड में सुना रही है। बता दें कि सुप्रिया वर्मा जगदतपुरवा ज्ञानापुर के निवासी शिवकुमार वर्मा की पुत्री है जो की पेशे से ट्रक चालक है जबकि काजल इसी गांव के किसान नानबच्चा की पुत्री है। नन्ही बबली प्राथमिक विद्यालय भीखमपुरवा के प्रधानाध्यापक मनोज मिश्रा की पुत्री व विश्व चैंपियन अंशिका मिश्रा की बहन है। प्रधानाध्यापक मिश्र ने बताया कि इस विद्यालय की तीन बच्चियों सुप्रिया, काजल और बबली का नाम इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड्स में दर्ज करने के लिए आवेदन किया गया था। फलस्वरुप इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड्स की टीम ने भेजे गए सभी दावों का परीक्षण करते हुए और बच्चियों की प्रतिभा को सराहते हुए नियमानुसार नाम दर्ज करने की सूचना मेल द्वारा प्रेषित की है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड्स की टीम इसी दिसंबर माह के दूसरे सप्ताह में गोंडा आकर उक्त के संबंध में विद्यालय की तीनों बच्चियों को प्रमाण पत्र और मेडल देकर सम्मानित करेगी। बताते चलें कि इसी विद्यालय की होनहार अंशिका मिश्रा ने अबतक अनेक रिकॉर्डस बनाकर देश प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। अब उसी से प्रेरणा लेते हुए यहां की तीन अन्य बच्चियां अलग अलग क्षेत्रो में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रही हैं, जो विद्यालय परिवार सहित जिले और प्रदेश के लिए गौरव की बात है।