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टायफाइड की आड़ में कोरोना वायरस छीन रहा ज़िंदगियाँ, हो जाये सावधान

 

अगर आपकी सांस फूल रही है, बुखार व खांसी जैसे लक्षण दिख रहे हैं और रैपिड या आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में आप कोरोना निगेटिव हैं तो एक बार आप टायफाइड जांच जरूर करा लें। कारण, टायफाइड की आड़ में कोरोना वायरस तमाम कोरोना जांच के जरिये लोगों को धोखा दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों को टायफाइड है वे कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद जांच में निगेटिव मिल रहे हैं। विशेषज्ञों ने आशंका जाहिर की है कि टायफाइड के कारण कोरोना का वायरस जांच में पकड़ नहीं आ पा रहा है, जबकि वे वास्तव में कोरोना संक्रमित होते हैं।

मायागंज अस्पताल से लेकर सदर अस्पताल तक बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भर्ती हैं, जिनमें तेज बुखार से लेकर खांसी, बुखार व गले में दर्द जैसे तमाम लक्षण कोरोना के मिल रहे हैं लेकिन वे रैपिड या आरटीपीसीआर जांच में कोरोना निगेटिव मिल रहे हैं। मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजकमल चौधरी कहते हैं कि मायागंज अस्पताल में करीब पांच से सात प्रतिशत ऐसे टायफाइड मरीज भर्ती हैं, जिनमें कोरोना होने के सारे प्रमाण है। लेकिन रैपिड एंटिजन या फिर आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट उनकी निगेटिव है। चूंकि ऐसे मरीजों में कोरोना के सभी लक्षण मिलते हैं, ऐसे में उन्हें कोरोना का संदिग्ध मरीज मानकर उनका टायफाइड के साथ-साथ कोरोना का जांच-इलाज किया जा रहा है।

डॉ. चौधरी कहते हैं कोरोना के लक्षण वाले टायफाइड मरीजों में बुखार 102 से 103 डिग्री फारेनहाइट तक रहता है। उनमें भी गला सूखने, खरास, खांसी, दम फूलने (जल्दी-जल्दी सांस लेने की लक्षण) देखने को मिल रहे हैं। जरा सा चलते पर उनकी सांसें फूलने लगती हैं। ऐसे टायफाइड के मरीजों को कोरोना से मुक्ति के साथ-साथ उन्हें ठीक होने में लंबा वक्त लगता है। कोरोना संक्रमित जहां दस दिन में वायरस से मुक्त हो जाता है, वहीं टायफाइड संग कोरोना संक्रमित को ठीक होने में 14 से 20 दिन का समय लग रहा है।

मुंगेर जिले की 35 साल की पुलिस कमांडेंट में कोरोना के सारे लक्षण थे, लेकिन कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव थी। टायफाइड जांच में वे पॉजिटिव थीं। उनका कोरोना के साथ-साथ टायफाइड का इलाज चला, तब जाकर वे ठीक हुईं। इनका होम आइशोलेशन में चिकित्सक की निगरानी में इलाज चला था।

सर्दी, खांसी के तेज बुखार के साथ इशाकचक क्षेत्र की 22 साल की युवती ने 17 अप्रैल को कोरोना जांच करायी तो वह निगेटिव निकली। लेकिन उसमें कोरोना के सारे लक्षण थे। उसका फिर तीन दिन बाद टायफाइड की जांच (विडॉल टेस्ट) करायी गयी तो वह टायफाइड पॉजिटिव निकली। इसके बाद कोरोना ड्रग लाइन में इस्तेमाल होने वाली सभी दवा के साथ एंटीबॉयोटिक (लिवोफ्लॉक्सासिन ग्रुप की दवा) दवा दी गयी। तब जाकर वह ठीक हुई।

कोरोना के लक्षण दिखे लेकिन कोरोना जांच रिपोर्ट निगेटिव हो तो एक बार अपनी टायफाइड, एचआरसीटी (फेफड़े का सिटी स्कैन), डी-डाइमर, सीआरपी जांच करा लें। कोरोना निगेटिव संग टायफाइड की बीमारी निकले तो चिकित्सक से संपर्क कर उनकी सलाह के अनुसार दवा लेना शुरू कर दें। ऐसा न हो कि टायफाइड के चक्कर में आपका फेफड़ा पूरी तरह से संक्रमित हो जाये और आपकी जान पर बन आये।

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