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दोस्त ने क़ायम की दोस्ती की मिसाल,मुस्लिम दोस ने हिंदू दोस्त को दी मुखग्नि

 इटावा के मुस्लिम दोस्त ने निभाया याराना हिंदु दोस्त की चिता को दी मुखाग्नि


इटावा ;यह दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे ,तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ने छोड़ेंगे , सर्वाधिक लोकप्रिय फिल्मो मे शुमार शोले फिल्म का यह गाना हर किसी को याद होगा।

उत्तर प्रदेश के इटावा के एक मुस्लिम ने हिंदु दोस्त की कोरोना से हुई मौत के बाद ऐसा ही याराना पेश किया है कि हर कोई उसकी दाद दे रहा है ।

यहां खून के रिश्ते से बड़ी दोस्ती निकल आई । जब अपनों ने मोड़ा मु्ंह तो मुस्लिम दोस्त ने 400 किलोमीटर दूर जाकर शव को मुखाग्नि दे दोस्त को अंतिम विदाई दी ।

दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे हैं जो हमें ईश्वर की तरफ से नहीं मिलते बल्कि उन्हें हम खुद अपनी जिंदगी के लिए चुनते हैं । उन्हीं में से एक रिश्ता है दोस्ती का । ये दोस्त हमारी खुशी में साथ नाचते हैं, तो गम में हाथ थामे रहते हैं । ऐसे ही दोस्ती की मिसाल पेश की इटावा के सिराज अहमद ने । उसने न सिर्फ अपने दोस्त को कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि भी दी ।

प्रयागराज की संगम नगरी के जयंतीपुर इलाके में हेम सिंह अकेले ही रहते थे । कुछ वर्ष पहले उनकी बेटी और पत्नी की मृत्यु हो गई थी । वे हाईकोर्ट में ज्वाइंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात थे । एक हफ्ते पहले वे कोरोना की चपेट में आ गए। कोरोना ग्रसित होने के बाद हेमसिंह ने अपने मित्र सिराज को फोन कर कोरोना ग्रसित होने की जानकारी दी । सिराज ने उन्हें सिविल लाइंस के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया ।

निजी अस्पताल ने उन्हें दो लाख रुपये जमा करने को कहा । जिसकी जानकारी उन्होंने अपने मित्र सिराज को दी । फिर सिराज ने तुरंत उनके अकाउंट में दो लाख रुपए ट्रांसफर कर दिया । पिछले शुक्रवार को अचानक से उनको सांस लेने में तकलीफ होने लगी । कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई ।

हेमसिंह के परिवार मे कई और भी सदस्य थे लेकिन कोई भी ना तो उनके शव को लेने के लिए तैयार हुआ और ना ही उनके शव को अंतिम संस्कार करने के लिए आगे आया तब सिराज ने दोस्ती का फर्ज अदा किया।

सिराज इटावा शहर के रहने वाले है और बडे ठेकेदारो मे शुमार हैं ।


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