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टीकाकरण ही है कोरोना को मात देने का एक मात्र सहारा: मुख्यमंत्री योगी

 

लखनऊ; उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 के संक्रमण में आ रही कमी और रिकवरी दर के बेहतर होने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में टेस्टिंग और टीकाकरण अति महत्वपूर्ण है।

 योगी ने शनिवार को टीम-9 की बैठक में उपचार की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए और टेस्ट, ट्रेस, ट्रीट की नीति को प्रभावी ढंग से लागू रखने पर बल दिया। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में कोरोना के 2,66,326 टेस्ट किए गए। यह संख्या अब तक एक दिन में किए गए टेस्ट में सर्वाधिक है। पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 30,317 नए मामले सामने आए हैं जबकि 38,826 संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। इससे प्रदेश के कुल एक्टिव मामलों में उल्लेखनीय कमी आयी है।

उन्होने रैपिड एंटीजन टेस्ट की संख्या में वृद्धि के निर्देश देते हुए कहा कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी रैपिड एंटीजन टेस्ट कराए जाएं। कोविड के लक्षण वाले व्यक्तियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर्स से भी मेडिकल किट दिए जाएं। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तथा सभी हेल्पलाइन सेवाएं सुचारु और प्रभावी ढंग से कार्य करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड के खिलाफ जंग में टीकाकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश में सर्वाधिक टीकाकरण उत्तर प्रदेश में हुआ है। 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के निःशुल्क टीकाकरण की घोषणा करने वाला उत्तर प्रदेश, देश का पहला राज्य है। आज से प्रदेश में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के कोविड टीकाकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। अधिक संक्रमण दर और पॉजिटिविटी वाले सात जिलों के 85 केंद्रों पर 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग का टीकाकरण किया जा रहा है। इसे चरणबद्ध रूप से प्रदेश के शेष सभी जिलों में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से अधिक आयु वालों के वैक्सीनशन के साथ-साथ प्रदेश में 2500 केंद्रों पर 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण कार्य पूर्ववत जारी है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाए जाने की दिशा में तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा भी ऑक्सीजन प्लांट लगवाए जा रहे हैं। इसके साथ ही हमें नए विकल्पों की तलाश करने की भी आवश्यकता है। आईआईटी कानपुर सहित अन्य तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों से संवाद स्थापित कर नाइट्रोजन को ऑक्सीजन में कन्वर्ट करने की संभावनाओं को तलाशा जाए। चीनी मिलों में थोड़े तकनीकी सहयोग से ऑक्सीजन उत्पादन भी किया जा सकता है, इस संबंध में विशेषज्ञों की मदद लेते हुए कार्यवाही की जाए।



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