बागपत जनपद के लिए बड़े खुशी की खबर है ,क्योकि जनपद के तीन लाल सेना के अधिकारी बने जिसको लेकर उनके परिवारों में भी खुशी का माहौल है।
दरअसल बागपत जनपद के गांव लुहारी , शाहपुर बड़ौली और बिहारीपुर वो गांव है। जिनके तीन बेटे सेना में लेफ्टिनेंट बने है। देहरादून रक्षा अकादमी की पासिंग आउट परेड में तीनों को बैंज लगाए गए है। तीनो एनडीए के माध्यम से सलेक्ट हुए है। जहाँ तीन साल तक पहले इन्होंने 3 साल तक पुणे खड़कवासला में सैन्य प्रशिक्षण लिया जिसके बाद देहरादून रक्षा अकादमी में एक साल प्रशिक्षण के बाद लेफ्टिनेंट बने।
सेना में लेफ्टिनेंट बनने वाले एक शाहपुर बड़ौली गांव के रहने वाले शुभम तोमर है जिनके पिता जगपाल सिंह खुद मेजर पद से रिटायर्ड है।जबकि दादा कैप्टन रह चुके है और पूर्व फ़ौजी संगठन के अध्यक्ष है। वही दूसरे नवनियुक्त लैफ्टिनेंट लुहारी गांव के रहने वाले अरिवंद दांगी है जो किसान परिवार से है ,जबकि तीसरे बिहारीपुर गांव के मनीष तोमर है जिनके पिता बीएसएफ में ऐसे एसआई है। वही अवर बात करे इनके परिवारो की तो खुशी का माहौल है।
दरअसल बागपत जनपद के गांव लुहारी , शाहपुर बड़ौली और बिहारीपुर वो गांव है। जिनके तीन बेटे सेना में लेफ्टिनेंट बने है। देहरादून रक्षा अकादमी की पासिंग आउट परेड में तीनों को बैंज लगाए गए है। तीनो एनडीए के माध्यम से सलेक्ट हुए है। जहाँ तीन साल तक पहले इन्होंने 3 साल तक पुणे खड़कवासला में सैन्य प्रशिक्षण लिया जिसके बाद देहरादून रक्षा अकादमी में एक साल प्रशिक्षण के बाद लेफ्टिनेंट बने।
सेना में लेफ्टिनेंट बनने वाले एक शाहपुर बड़ौली गांव के रहने वाले शुभम तोमर है जिनके पिता जगपाल सिंह खुद मेजर पद से रिटायर्ड है।जबकि दादा कैप्टन रह चुके है और पूर्व फ़ौजी संगठन के अध्यक्ष है। वही दूसरे नवनियुक्त लैफ्टिनेंट लुहारी गांव के रहने वाले अरिवंद दांगी है जो किसान परिवार से है ,जबकि तीसरे बिहारीपुर गांव के मनीष तोमर है जिनके पिता बीएसएफ में ऐसे एसआई है। वही अवर बात करे इनके परिवारो की तो खुशी का माहौल है।
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